

स्वामी श्री वीरब्रह्मेन्द्र
कालज्ञानम.....
कालज्ञानम के गीत - (तेलुगु)
"भारत भूमिनि परिपालनमु चेय
परदेश वासुलु वच्चेनिमा ।
उत्तर देशमुन वैश्यकुलमुनन्दु
उत्तम गन्धोकडु पुट्टेनिमा
लोकमन्तयुनु एकम्बुगा चेसे
एकु पट्टेडु वाडु वच्चेनिमा ।'
अर्थात् ओ ! मेरी प्यारी जनता ! सुनो ! मैं तुम्हें अपनी भविष्वाणी सुनाता हूँ।
हाय ! भारत की भूमि पर शासन करने, विदेशी लोग आयेंगे उत्तर भारत के उत्तम वैश्य कुल में गाँधी जन्मेगा ।
विभिन्न मानव लोक को एकता के सूत्र में पुरोने वाला, तकली चलाने वाला आयेगा ।
(तेलुगु) -
"श्वेत मुखलु धूम शकटमुलु कल्पिञ्चि
भूतलम्मुन इनुप कम्मुल पै
सूत्रमेरिगिन पश्चिमोत्तर दिशलन्दु
आत्रम्मुग नडिपिञ्चेरुमा ।"
अर्थात् श्वेतवर्णी लोग भाँप से चलने वाली गाड़ियों का आविष्कार करेंगे और पश्चिमोत्तर प्रान्तों में,
जहाँ तकनीकी विधि भली भाँति परिचित है,
लोहे की पटरियों पर उन्हें चलाने के लिए आकुल होंगे ।
(तेलुगु) -
'ब्राह्मलकु पीटलु माललकु मञ्चालु
महिलो वेसे दिनमु लोच्चेनिमा ।"
अर्थात् तथा कथित उच्च वर्ण में जन्मे ब्राह्मणों को चौकियाँ डाली जायेंगी अर्थात् कम आदर होगा और जो निम्न वर्ग में जन्में हैं, उन दलितों को चौपाइयाँ डाली जायेंगी अर्थात् अधिक आदर होगा ।
(तेलुगु) -
"मुण्ड मोपुलेल्ला मुस्तैदु लय्येनि
मुन्दोच्चे गति मीकु तेलिसेनिमा ।"
अर्थात् विधवाएँ सभी सुहागिन होंगी अर्थात् पुनर्विवाह का प्रावधान होगा आगे चलकर तुम्हें नियति का पता चलेगा ।
(तेलुगु) -
"मद्यपानमु चेसि महिमीद कोन्दरु
गुडुलाटकु तामु वच्चेनिमा
गद्दे सुद्दलु चेप्पि कालमु गडिपेरु
विद्देलतो विर्रा वीगेरुमा ।।"
अर्थात् धरती पर कुछ लोग मद्यपान करके लड़ने झगड़ने आयेंगे । राज्याधिकार की बातों से समय व्यतीत करेंगे और अपने पाण्डित्य पर बहुत इतरायेंगे
(तेलुगु) -
“तिरुपति वेंकटेश्वरु गुडिलो म्लेच्छुलु
अद्भुतम्बुग आडि पाडेनिमा
गरुड ध्वजम नाना दिक्कुलकु तानेगि
चोद्यमुग आडुचुण्डेनिमा ।'
अर्थात् तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर में विदेशी अद्भुत ढंग से नृत्य करेंगे गायेंगे । भगवान विष्णु का चिह्न गरुड ध्वज विविध दिशाओं को जायेगा और अद्भुत रूप से फहरायेगा ।
